राजेंद्र पटेल विशेष संवाददाता
पिपरिया। महाकाली मैदान में इन दिनों लगा मेला लोगों के मनोरंजन के बजाय अव्यवस्थाओं को लेकर चर्चा में है। मेले में उमड़ रही भीड़ के बीच सुरक्षा इंतजामों को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। झूलों और अन्य मनोरंजन साधनों के कारण कुछ लोगों को चक्कर, उल्टी और घबराहट जैसी परेशानियां होने की शिकायत सामने आ रही है। ऐसे में किसी बड़ी अनहोनी की स्थिति से इनकार नहीं किया जा सकता।
मेले में पार्किंग व्यवस्था भी सवालों के घेरे में है। भीड़ बढ़ने के साथ वाहनों का दबाव बढ़ रहा है, लेकिन व्यवस्थित पार्किंग और यातायात नियंत्रण को लेकर पर्याप्त इंतजाम नजर नहीं आ रहे। आपात स्थिति में दमकल या एंबुलेंस के पहुंचने के लिए रास्ता कितना सुरक्षित और खुला है, यह भी बड़ा सवाल बना हुआ है।
अग्निशमन व्यवस्था पर भी सवाल
मेले में बड़ी संख्या में लोग पहुंच रहे हैं। ऐसे में आगजनी जैसी आपात स्थिति से निपटने के लिए पर्याप्त अग्निशमन इंतजाम होना जरूरी है। लेकिन मौके पर सुरक्षा व्यवस्था को लेकर लोगों में चिंता देखी जा रही है। भगदड़ या आग जैसी स्थिति बनी तो भीड़ को सुरक्षित बाहर निकालने की क्या व्यवस्था है? यह सवाल प्रशासनिक व्यवस्था पर निशाना साध रहा है।
मनचलों की मौजूदगी से महिला सुरक्षा पर सवाल
भीड़भाड़ वाले मेले में महिलाओं और युवतियों की सुरक्षा भी अहम मुद्दा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि मेले में मनचलों की मौजूदगी से असहज स्थिति बन रही है। ऐसे में सवाल उठता है कि महिला सुरक्षा के लिए पुलिस ने क्या विशेष इंतजाम किए हैं? क्या पर्याप्त महिला पुलिसकर्मी, सादे कपड़ों में पुलिसकर्मी और लगातार पेट्रोलिंग की व्यवस्था है?
आखिर इतनी मेहरबानी क्यों?
मेले में उमड़ रही भीड़ से आयोजकों को भले ही फायदा हो रहा हो, लेकिन सुरक्षा मानकों से समझौता आम लोगों के लिए भारी पड़ सकता है। सवाल यह है कि प्रशासन और पुलिस की निगरानी आखिर कितनी प्रभावी है? नियमों की अनदेखी पर कार्रवाई क्यों नहीं दिखाई दे रही? किसी हादसे के बाद व्यवस्था जागे, उससे पहले सुरक्षा इंतजामों की समीक्षा करना जरूरी है।
अब लोगों की नजर प्रशासन और पुलिस पर है कि महाकाली मैदान के मेले में सुरक्षा व्यवस्था को लेकर ठोस कदम कब उठाए जाते हैं या फिर किसी अनहोनी का इंतजार किया जाएगा।










