पिपरिया (नि.सं.) तुलसी नगर में चल रहे ज्ञान यज्ञ में उपरोक्त वक्तव्य देते हुये श्री सुरेशचंद जी महाराज ईगन घाट वालों ने अपने प्रवचन के दौरान उद्धृत किया, आपने दीन का बहुयामी तरीके से परिभाषित करते हुये भगवान को दीन क्यों प्रिय है, यह बताया। जो ईश्वर की लय को प्राप्त कर लें उसे दीन कहते है। जगतगुरू लक्ष्माणाचार्य जी ने जाति एवं वर्णों पर प्रहार करते हुये कुरूसूत्र के श्लोक को परिभाषित करते हुये चारों वर्णों को हमारे शरीर में ही बताया। उनका यह वक्तव्य बहुत ही सार गर्भित रहा, पैरो को शूद्र, पेट वेश्य, भुजाओं को क्षत्रिय, सिर को ब्राम्हण को निरूपित करते हुये बताया कि शरीर के अन्य अंगो की क्षति होने से जीवन बच सकता है। किन्तु सिर नष्ट होते ही जीवन समाप्त हो जाता है। सुश्री शाति सिरिया ने बताया कि श्रीराम चरित मानस की मात्र एक चौपाई जीवन में उतार लेने से जीवन धन्य हो जाता है यूवा कथाकार प्रयागराज से पधारे शिवम्र शुक्ला प्रभू के अनुग्रह से ही सौभाग्य प्राप्त होता है को उदाहरण देकर प्रतिपादित किया। नगर में चल रहे रामचरित मानस यज्ञ एवं नवन्हान परायण के भव्य कार्यक्रम में सुबह से ही क्षेत्र की जनता अपनी उपस्थिति दे रही है। सुबह यज्ञ मण्डप की परिक्रमा एवं रामायण पाठ के उपरान्त ज्ञान यज्ञ में बाहर से आये विध्दवान वक्ताओं के प्रवचन सुने जा रहे है पूरा क्षेत्र धर्ममय आवरण से ढका हुआ एवं क्षेत्र में सकारात्मकता का आवास हो रहा है। यह क्रम लगातार जारी हो रहा है।










