राजेंद्र पटेल विशेष संवाददाता
सड़क हादसे में हुई थी मौत, ब्रेन डेड घोषित होने के बाद एम्स भोपाल में किया गया अंगदान; शुक्रवार सुबह 11 बजे खापाखुर्द में अंतिम संस्कार
बनखेड़ी। सड़क हादसे में गंभीर रूप से घायल होकर जिंदगी की जंग हारने वाली ग्राम खापाखुर्द निवासी विलासा तामसी शर्मा को शुक्रवार सुबह 11 बजे उनके गृह ग्राम में अंतिम विदाई दी गई। प्रशासन की ओर से उन्हें गार्ड ऑफ ऑनर देकर सम्मानपूर्वक अंतिम विदाई दी गई। इस दौरान परिवार, रिश्तेदारों और ग्रामीणों की आंखें नम रहीं।
विलासा की मौत के बाद उनके परिजनों ने जो निर्णय लिया, वह इस दुखद घटना के बीच मानवता की बड़ी मिसाल बन गया। भोपाल एम्स में ब्रेन डेड घोषित किए जाने के बाद परिजनों की सहमति से विलासा के अंगदान की प्रक्रिया पूरी की गई। चिकित्सकों द्वारा उनकी दोनों किडनी और लीवर सहित आवश्यक अंगों को दान प्रक्रिया के तहत सुरक्षित किया गया, ताकि जरूरतमंद मरीजों को नया जीवन मिल सके।
सलकनपुर दर्शन के लिए जाते समय हुआ था हादसा
जानकारी के अनुसार करीब 30 वर्षीय विलासा तामसी शर्मा कुछ दिन पहले मोटरसाइकिल से सलकनपुर स्थित देवी मंदिर में दर्शन के लिए जा रही थीं। इसी दौरान बुधनी के पास सलकनपुर रोड पर उनका सड़क हादसा हो गया। दुर्घटना में उनके सिर में गंभीर चोटें आईं। प्रारंभिक उपचार के बाद उन्हें बेहतर उपचार के लिए भोपाल स्थित अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) ले जाया गया।
एम्स में चिकित्सकों की निगरानी में उनका उपचार किया गया, लेकिन गंभीर चोटों के चलते उनकी स्थिति में सुधार नहीं हो सका। चिकित्सकों ने उन्हें ब्रेन डेड घोषित किया। इसके बाद परिवार के सामने बेहद कठिन परिस्थिति थी। एक ओर परिवार ने अपनी प्रिय सदस्य को खो दिया था, वहीं दूसरी ओर उनके अंगों के माध्यम से दूसरे जरूरतमंद मरीजों को जीवन देने का अवसर था।
दुख की घड़ी में परिवार ने लिया बड़ा फैसला
विलासा के पति अखिलेश शर्मा और परिजनों ने असहनीय दुख के बीच अंगदान की सहमति देकर संवेदनशीलता का परिचय दिया। परिवार का कहना था कि विलासा अब उनके बीच नहीं हैं, लेकिन यदि उनके अंगों से किसी दूसरे व्यक्ति को जीवन मिल सके तो इससे बड़ी श्रद्धांजलि उनके लिए कोई नहीं होगी।
परिजनों की सहमति के बाद भोपाल एम्स में चिकित्सकों की देखरेख में अंगदान की प्रक्रिया पूरी की गई। इस पहल से गंभीर बीमारी से जूझ रहे जरूरतमंद मरीजों को नई जिंदगी मिलने की उम्मीद है।
गार्ड ऑफ ऑनर के साथ अंतिम विदाई
अंगदान की प्रक्रिया पूरी होने के बाद विलासा का पार्थिव शरीर गृह ग्राम खापाखुर्द लाया गया। शुक्रवार सुबह करीब 11 बजे अंतिम संस्कार किया गया। इस दौरान प्रशासन की ओर से गार्ड ऑफ ऑनर देकर उन्हें अंतिम विदाई दी गई। अंतिम संस्कार में बड़ी संख्या में ग्रामीण, रिश्तेदार और परिचित मौजूद रहे।
एक सड़क हादसे ने परिवार से उनकी प्रिय सदस्य को हमेशा के लिए छीन लिया, लेकिन विलासा के परिजनों के अंगदान के फैसले ने इस दुखद घटना को मानवता और सेवा की प्रेरणादायक कहानी बना दिया। विलासा अब इस दुनिया में नहीं हैं, लेकिन उनके अंगों से यदि किसी जरूरतमंद को जीवन मिलता है तो उनकी स्मृति उन परिवारों के बीच हमेशा जीवित रहेगी।










