सड़क के बदहाल होने से महिला मरीज की जा सकती थी जान – पाचनजोत की पुलिया सड़क बनाने का प्रयास नही विधायक ने अपने गृह ग्राम की सड़क का किया भूमि पूजन – हितेश निरापुरे
आमला – आदिवासी बाहुल्य क्षेत्र के हालत बत से बततर होते जा रहे है, सड़क पुलिया निर्माण नही होने और जनप्रतिनिधियों के द्वारा प्रयास ना करने के कारण अब लोगो की जान पर बन आई है, बीते दिनों पाचनजोत गाव की आदिवासी महिला के उपचार के लिए ग्रामीणों ने चार किलोमीटर खाटोली पर रख कर महिला को उपचार के लिए आमला अस्पताल लाया गया था, लेकिन हालत गम्भीर होने के चलते महिला को नागपुर रिफर कर दिया गया ।
भाजपा सरकार के जनप्रतिनिधियों की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए जिला पंचायत सदस्य हितेश निरापुरे ने कहा कि अगर गाँव मे आने-जाने के लिए सड़क अच्छी होती तो शायद ही महिला का उपचार समय पर हो जाता लेकिन आमला क्षेत्र के ग्रामीण इलाको में आज भी बहुत सी सड़के ओर पुल-पुलिया निर्माण नही होने के चलते ग्रामीणों का सीधा सम्पर्क शहर से नही है, इस वजह से ग्रामीणों को मूलभूत सुविधाओं सर वंचित रहना पड़ रहा है। ऐसे में विधायक द्वारा आदिवासी ग्रामीण क्षेत्र की सड़कों पुल-पुलिया निर्माण का प्रयास ना करके स्वंय के ग्रह ग्राम ससुन्दरा की सड़क का भूमि पूजन में लगे हुए है इससे ग्रामीणों में नाराजगी दिखाई दे रही है। क्योंकि जिस गाव में एक ही सड़क हो वो भी आने-जाने लायक ना हो तो वहां पर सड़क निर्माण की आवश्यकता सबसे पहले है, लेकिन जनप्रतिनिधि तो स्वंम के गांव के मार्ग को बनाने के लिए प्रयास में लगे है। ऐसे में आदिवासी ग्रामीण इलाकों की हालत और भी खराब होते जा रही है बच्चों सहित मरीजो को शिक्षा के साथ स्वस्थ सुविधाए नही मिल पा रही है, हम जल्द ही कलेक्टर को पत्र सौपकर पुलिया ओर सड़क निर्माण कराए जाने की मांग करेंगे ।
पुल के नही होने से मरीजो के लिए नही पहुच पाती एम्बुलेंस
ग्राम पाचनजोत मार्ग पर सालो से ग्रामीण पुलिया निर्माण की मांग कर रहे हैं लेकिन जनप्रतिनिधियों द्वारा इस ओर कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा है जिसके कारण सबसे ज्यादा मरीजों की मुसीबत बन गई है मरीजों को लाने ले जाने में ग्रामीणों को 4 किलोमीटर पैदल चलकर सड़क तक पहुंचना पड़ता है ऐसी स्थिति में कभी-कभी तो मरीज की हालत गंभीर हो जाती है जान तक जान भी जोखिम मैं आ जाती फिर भी इस और जनप्रतिनिधियों का कोई ध्यान नहीं होना कहीं ना कहीं क्षेत्र के साथ भेदभाव पूर्ण रवैया दिखाई पड़ रहा है क्योंकि ग्रामीण द्वारा सालों से पुलिया निर्माण की मांग की जा रही है लेकिन निर्माण कार्य शरू नही किया जा रहा है ।
अधिकारियों को देना चाहिए ध्यान
जनप्रतिनिधियों के साथ साथ प्रशासनिक अधिकारी भी आदिवासी बाहूल्य क्षेत्रों के विकास की ओर अग्रसर नही है जिसके कारण आए दिन कोई अप्रिय घटना सुर्खियों में आ जाती अधिकारी भी कागजी घोड़े दौड़ाने में मशगूल है जब भी पतनजोत ग्राम की सड़क पुलिया के निर्माण की बात आती है तो अधिकारियों का एक ही जवाब सामने आता है कि सड़क बन चुकी है पुलिया की स्वीकृति मिल गई है, सालो से जबकि ग्रामीण सड़क और पुलिया निर्माण की मांग करते आ रहे है। उसके बाद भी अधिकारियों का कहना होता है कि जल्द ही निर्माण कार्य कराया जायेगा इस बात से साफ जाहिर होता है कि कही ना कही जनप्रतिनिधियों के ढुलमुल रवैय के चलते निर्माण का श्रीगणेश नही हो पा रहा है ।
इनका कहना है
हम आज आज़ादी का अमृत महोत्सव मना रहे हैं वही दूसरी तरफ आज भी आमला विधानसभा के ग्रामीण क्षेत्र सड़क, बिजली, शिक्षा, स्वास्थ्य सुविधाओं से वंचित हैं, मूलभूत सुविधाओं की स्थिति अत्यंत दयनीय है। पिछले 18 सालों से एक ही पार्टी के स्थानीय विधायक और सांसद होने के बावजूद भी वे अपनी पार्टी की सरकार से क्षेत्र के विकास कार्य करवाने में सक्षम नहीं हैं, आदिवासी बाहुल्य ग्राम पाचनजोत के विषय में कलेक्टर महोदय को पत्र लिखकर जल्द से जल्द सुलभ आवागमन के साधन विकसित करने की माँग की है ।
हितेश निरापुरे जिला पंचायत सदस्य आमला