पिपरिया । नगर में चल रहे ज्ञान में अपार जन समुदाय की उपस्थिति में पधारे ब्रम्हचारी जी महाराज मांगरोल घाट वाले ने उपरोक्त उदगार व्यक्त किया। आपने भगवान श्रीराम को परिभाषित करते बताया, राम कौन है, जो बीत गया वह राम है, जो चल रहा है वह राम है, जो होगा वह राम है, तीनों कालों में राम ही राम है। इसके पूर्व प्रयागराज से पधारे श्री शिवम शुक्ला जी ने ध्वजा और पताका के बीच में अन्तर स्पष्ट किया, पताका ध्वजा से श्रेष्ठ है। इसलिये हमें अपनी योग्यता का झंडा नहीं पताका फहराना चाहिए। विद्ववान जगतगुरू महाराज लक्ष्मणाचार्य जी ने समझाया कि सफलता प्राप्ति का एक मूल मंत्र है गुरू का आश्रय। रात्रिकालीन सत्र में अयोध्याधाम से पधारी सुश्री शांतिश्रिया जी ने अपने संबोधन में बताया कि देश की माटी, भारत भूमि की महत्ता पर प्रकाश डाला। इगनघाट से पधारे विद्वान वक्ता श्री सुरेशचन्द्र जी महाराज जी ने यही दीन प्यारे वेद पुकारे का विश्लेषण करते हुये आज के जीवन से जोड़ा।
नगर में चल रहे 72 वर्ष पुरानी परम्परा में क्षेत्र का अपार जन समूह उमड़ रहा है, जनता की सेवा के लिये नगर की स्व-सेवी संस्थाएँ भी बढ़-चढ़ कर भाग ले रही है।









